जादुई ढाबा | Jadui Dabba | Jadui Hindi Kahaniya

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जादुई ढाबा | Jadui Dabba | Jadui Hindi Kahaniya

Jadui Dabba: एक समय की बात है एक गांव में एक गरीब परिवार रहता था उस परिवार का मुखिया का नाम रमेश और उसकी पत्नी सीता और उनके बच्चे और उस परिवार में रमेश की बूढ़ी अम्मा रहती थी रमेश बहुत ही गरीब था। वह अपना गुजारा जैसे तैसे करता था ।

एक दिन रमेश को काफी ज्यादा बुखार आ जाता है उसका समय पर इलाज न मिलने के कारण वह खत्म हो जाता है उसके बाद सीता अकेली पड़ जाती है उसका किसी भी प्रकार से कोई इनकम सोर्स नहीं था उसके छोटे-छोटे बच्चे थे एक बूढ़ी अम्मा थी।

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वह सोच नहीं पा रही थी इनका ध्यान कैसे रखें लेकिन रमेश का एक छोटा भाई भी था मोहन वह काफी लालची किस्म का व्यक्ति था जब उसका भाई रमेश की मृत्यु हो जाती हैं तो मोहन उसके परिवार में जाकर कुछ दिन अपनी अम्मा और रमेश के बच्चे और पत्नी को खाना देने का नाटक करता है कुछ दिन बीत जाने के बाद मोहन अपनी मां से जमीन के कागजों पर अंगूठा लगवाने के लिए बोलता है और साथ ही बोलता है कि आप भाभी और बच्चों का टेंशन ना ले मैं उनकी अच्छी खासी सेवा करूंगा उनको किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आने दूंगा।

उसके बाद उसकी अम्मा ने उस जमीन के कागज पर अंगूठा लगा देती है तीन-चार दिन होने के बाद रमेश अपनी जमीन को सेठ के हाथों में बेचकर गांव से निकल जाता है जब इस बात का पता उस बूढ़ी अम्मा और उस रमेश की पत्नी सीता को पता चलता है तू वह काफी ज्यादा परेशान हो जाती है वह सोच नहीं पाती है कि अब मैं क्या करूं जिससे मेरे परिवार का गुजारा हो सके।

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कुछ दिनों तक गांव वालों ने उनके हालातों को देखकर उनके लिए भोजन की व्यवस्था करने लगे लेकिन ज्यादा दिन नहीं कर पाए उसके बाद गांव वाले उनको अपनी हालत पर छोड़ दिए जब उनके पास भोजन करने के लिए लास्ट दाल चावल बच्चे तो उनको बनाकर खाने लगे उसके बाद सीता अपने अम्मा से बोलते की अम्मा मेरे पास जो भी पैसे बच रहे थे वह सभी खर्च हो गए कल से मेरे को काम पर जाना पड़ेगा ताकि परिवार का कुछ पालन-पोषण हो सके।

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लेकिन मैं आपको इस हालात में छोड़ कर कैसे जा पाऊंगी तब मां बोलती है कि तुम टेंशन ना लो सब अच्छा ही होगा सीता अपने परिवार को खाना खिलाने के बाद बहुत ही कम खाना बचता है इसे वह खाना खाने बैठती है उसी समय एक बूढ़ी अम्मा बाहर आ जाती है और बोलती है कि घर में कोई है जैसे ही सीता घर से बाहर निकलती है तो बूढ़ी अम्मा बोलती है कि मैं काफी भूखी हूं क्या मेरे को खाना मिल सकता है।

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उसके बाद सीता अपने लिए बचे हुए खाने को अम्मा को उस बूढ़ी अम्मा को दे देती है और बैठ जाती है जब सीता परेशान देखते हैं तो वह बूढ़ी औरत बोलती है क्या बात है बेटी परेशान क्यों हो रही हो तब सीता अपनी पूरी बात उस बूढ़ी अम्मा को बता देती है जैसे ही वह बूढ़ी अम्मा खाना खाती है तो बोलती है तो आपने कितना अच्छा खाना बनाया है।

उसके बाद बोलती है तुम एक दाल चावल का ठेला क्यों नहीं लगा लेती हो मेरे पास एक जादुई नमक का पैकेट है यदि तुम इस नमक के पैकेट को अपने खाने में मिल आओगे तो बहुत ही ज्यादा खाना स्वाद हो जाएगा और इसके लिए आप अपने घर के सामने ही एक दाल चावल का थैला लगा लो जिससे आपको बाहर जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी और आपको अच्छी खासी इनकम भी होने लगे और वहां से चल जाती है।

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दूसरे दिन भगवान का नाम लेकर सीता दाल चावल बनाना शुरु कर देती है और उस नमक का प्रयोग करती है उस बूढ़ी औरत ने दिया था और बाहर थैला लगाकर लगती है तब वहां पर लोग आते हैं और खाना दाल चावल खाने लगते हैं खाना स्वादिष्ट होता है कि लोग तारीफ करते नहीं थकते सीता के थैले की चर्चा पूरे गांव में होने लगती है वह काफी ज्यादा फेमस हो जाती है।
उसके पास पैसे भी जुड़ने लग जाते हैं मैं सोचती है कि मैं अपने बिजनेस को बढ़ा लो एक मुन्ना नाम के लड़के को अपने पास काम करने के लिए रख लेती है लेकिन वह भी काफी चतुर और लालची था वह कुछ दिन काम करने के बाद सोचता है कि इतने से पैसे से मेरे से क्या होगा मैं भी एक अच्छा सा दाल चावल का थैला डाल लूं जिससे मेरी भी काफी ज्यादा इनकम हो सके।

लेकिन उससे पहले यह पता लगाना होगा कि आखिर सीता ऐसा खाने में क्या डालती हैं जिससे इतना अच्छा स्वाद आता है एक दिन जब सीता खाना बना रही होती है तो पीछे से मुन्ना उसकी सभी बातों और क्या डालते हैं।

उसके बारे में देख लेता है वह देखता है कि एक नमक की वजह से उसका खाना इतना टेस्टी बन रहा है एक रात मुन्ना उस नमक के पैकेट को चुरा लेता है और अपने घर पर ले जाता है मुन्ना द्वारा चुराए के पैकेट को सीता की बेटी देख लेता है और वह अपनी मां को सारी बात बता देती है।

सीता परेशान होकर भगवान से प्रार्थना करती है कि यह भगवान जैसे-तैसे मेरा गुजारा हो रहा था उसके बाद वापस मेरा पूरा सिस्टम खराब हो गया भगवान से प्रार्थना करती है कि अब सब कुछ कैसा चलेगा उसके बाद दूसरे दिन सुबह उठकर देखकर तो उसका नमक का पैकेट वापिस उसी घर में देखने को मिलता है दूसरी तरफ मुन्ना उस चुराये नमक का पैकेट से एक नमक के पैकेट से खाना बनाकर एक नया खेला चलाना शुरु कर देता है।

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जब लोग उसके थैले पर खाना खाते हैं तो इतना खराब टेस्ट बनता है कि लोग उसकी बुराई करने लगते हैं और पैसे वापस लेते हैं मुन्ना को अपनी गलती का एहसास होता है और वह सीता के पास आकर बोलता है कि मेरे को माफ कर दो मैंने आपके नमक चुराकर मेरा बिजनेस शुरू करने को चाहा मैं बहुत लालची हूं।

यदि आप मेरे को नौकरी वापस दोगे तो मेरा परिवार मेरे बच्चे भूखे नहीं मरेंगे तब सीता बोलती है कि मैं आपके बच्चे को भूख नहीं मरने दूंगा तुम वापस मेरे काम पर लग जाओ आपको गलती का एहसास हुआ इतना ही बहुत है मुन्ना बोलता है कि मैं दोबारा ऐसी गलती कदापि नहीं करूंगा और सीता उसे माफ कर देती है सीता वापस अपने बिजनेस को बढ़ाना शुरू कर देती है।

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